मजरूह सुल्तानपुरी ने जब पाकिस्तान शायर फैज़ को दिया था मुहँ तोड़ जवाब

मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म अक्तूबर 1919 का उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ था। तरक्कीपसंद शायरों में उनका नाम सरेफेहरिस्त लिया जाता है। उन्होंने तमाम हिन्दी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं, जो आज भी लोगों के जेहन में तरोताजा हैं।
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 मजरूह सुल्तानपुरी महान शायर ही नहीं पक्के देशभक्त भी थे। उन्होंने विदेशों में भी भारत को झुकने नहीं दिया। उनके जीवन का एक किस्सा भारत के प्रति उनके प्यार और देशभक्ति को दर्शाता है।
एक बार विदेश में मुशायरे के दौरान पाकिस्तानी शायर फैज अहमद फैज ने भारत की गरीबी का मजाक उड़ाया था। इस पर सुल्तानपुरी ने न सिर्फ फैज को मुशायरे के मंच से ही मुंहतोड़ जवाब दिया बल्कि भारत की गरिमा भी कायम रखी।
फैज ने एक तकरीर की जिसमें दुनिया के कुछ देशों के हालात का जिक्र करते हुए भारत पर भी कुछ तीखी टिप्पणी की। यह बात मजरूह को चुभ गई। जब मजरूह अपना कलाम पेश करने के लिए माइक पर गए तो फैज की उस हल्की टिप्पणी का करारा जवाब दिया।
मजरूह साहब ने कहा, ‘अभी जिस भारत के हालात पर फैज साहब रोशनी डाल रहे थे, मैं वहीं का हूं। मैं अपने भारत के बारे में फख्र के साथ कहता हूं कि यह चश्मा जो मेरी आंख पर है, भारत का बना हुआ है। मेरे जिस्म पर मबलूस शेरवानी, कुर्ता और पायजामा का कपड़ा भारत में ही बना है। मेरा कलम, मेरा मोजा और जूता भारत का ही बना हुआ है।’
मजरुह ने भारत की तो तारीफ की ही साथ ही पाकिस्तानी शायर को भी सबक सिखाया। उन्होंने आगे कहा, ‘फैज साहब के पाकिस्तान का आलम यह है कि उनकी पैंट-शर्ट का कपड़ा जर्मन का बना है तो चश्मा इंग्लैंउ का। कलम अमेरिकी है तो जूता जापान का है। अगर से सारे देश अपनी-अपनी चीज़े वापस ले लें तो फैज साहब की क्या हालत होगी, आप हज़रात महसूस कर सकते हैं।’
मजरूह की ये टिपण्णी सुनकर फैज़ मियाँ के होश उड़ गए और उन्हें मुहं की खानी पड़ी.
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